Monday, November 7, 2011

सादर इण्डिया के नवंबर,2011 अंक में प्रकाशित लघुकथा..

Friday, November 4, 2011

राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु अनेक कार्यक्रमों का आयोजन








नई दिल्ली। पिछले दिनों पूसा, नई दिल्ली स्थित विस्तार निदेशालय के सभागार में राजभाषा हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु राजभाषा हिंदी सगोष्ठी एवं काव्य संगोष्ठी सहित विभिन्न अन्य कार्यक्रमों व हिन्दी की प्रतियोगिताओं का रोचक व प्रेरक आयोजन किया गया। इस अवसर पर हिंदी में बेहतर कार्य करने वाले कर्मियों को विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से पुरस्कृत भी किया गया। समारोह के अंतिम दिन पुरस्कार वितरण के अवसर पर विभाग के अपर आयुक्त श्री वाई. आर. मीना की अध्यक्षता व प्रख्यात शायर जनाब मुज़फ्फर अली रज़मी के विशिष्ट आतिथ्य में एक सरस काव्य संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया। काव्य संगोष्ठी का अत्यन्त सफल संचालन किया शिष्ट-विशिष्ट प्रसिद्ध हिंदी कवि पंडित सुरेश नीरव ने। इस अवसर पर सर्वश्री जय सिंह आर्य जय, विजय भाटिया काका, रामेश्वर कांबोज देवबंदी, शोभा रस्तोगी शोभा, वेद प्रकाश वेद, शैलेन्द्र शुक्ला ने राजभाषा हिंदी व विभिन्न सामाजिक व सद्भाव के वियों पर अपनी बेहतरीन कविताएं सुनाकर श्रोताओं का दिल जीत लिया। आभार सहायक निदेशक श्री किशोर श्रीवास्तव ने माना। इस अवसर पर निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारी सर्वश्री मुजाहिद काज़मी (निदेशक) सहित अनेक अन्य अधिकारी व कर्मचारीगण उपस्थित रहे। इस काव्य संगोष्ठी की विशेषता यह रही कि पूरे आयोजन में कहीं कोई चुटकुला नहीं सुनाया गया, न कोई फूहड़ बातें की गईं।

रपटः अभिनन्दन कुमार र्स्वणकार (अनुवादक)

Wednesday, September 21, 2011

विस्तार निदेशालय में हिंदी पखवाड़े का शुभारम्भ




























नई दिल्ली। यहां विस्तार निदेशालय (कृषि मंत्रालय) के पूसा स्थित कार्यालय में हिंदी दिवस पर विशेष बैठक के दौरान राजभाषा संगोष्ठी के आयोजन सहित हिंदी पखवाड़े की प्रतियोगिताओं का शुभारम्भ किया गया। कार्यक्रम का प्रारम्भ अपर आयुक्त डा. वाई. आर. मीना, निदेशक विस्तार प्रबंध डा. आर. के. त्रिपाठी, निदेशक कृषि सूचना श्री मुजाहिद काज़मी एवं कार्यक्र्रम के मुख्य अतिथि कविता प्रतियोगिता के निर्णायक सर्वश्री प्रो. डा. हरीश नवल एवं डा. अर्चना त्रिपाठी के दीप प्रज्जवलन के साथ हुआ। इसके पश्चात विभागीय कविता प्रतियोगिता के दौरान दर्जन भर से भी अधिक प्रतिभागियों ने विभिन्न समसामयिक ज्वलंत विषयों पर अपनी मौलिक कविताएं सुनाई। कार्यक्रम का संचालन सहायक निदेशक श्री किशोर श्रीवास्तव ने किया।

रपटः अभिनन्दन कुमार स्वर्णकार (अनुवादक)

Monday, July 11, 2011

दो लघुकथाएं:-


परिणाम

दैनिक मज़दूरी पर लगे उस बच्चे को बाल श्रम से मुक्त कराए जाने के लिए जिस दिन उस समाज सेवी की पीठ ठोकी जा रही थी, उस दिन उस बच्चे और उसकी विधवा मॉं को भूखे पेट ही सोना पड़ा था।

माहौल

अपने पड़ोस में एक रिक्शे वाले को बसता देख उसका माथा ठनका। उसने सोचा, ‘उसके घर में तो पहले से ही आए दिन छोटे-मोटे घरेलू झगड़े होते रहते हैं, अब इस रिक्शे वाले के पड़ौस में आ जाने से तो माहौल और भी खराब हो जाएगा। रिक्शे-तांगे वाले तो बिना खाए-पिए और लड़े-झगड़े घर में रह ही नहीं सकते। यह भी रोज़ाना दारू पीकर घर में लड़े-झगड़ेगा और मेरे घर-परिवार का माहौल और खराब होगा।’
वह एक सप्ताह तक इसी तनाव से ग्रस्त रहते हुए ईश्वर से प्रार्थना करता रहा कि वह जल्द से जल्द इस रिक्शे वाले को उसके घर से दूर पहुंचा दे।
और उस दिन जब उसने रिक्शे वाले को कमरा खाली करके अपने बीबी-बच्चों के साथ अन्यत्र जाते देखा तो वह खुषी से फूला नहीं समाया। कौतूहलवश जब उसने एक अन्य रिक्शे वाले से उसके इस तरह से अचानक कमरा खाली करके दूसरी जगह जाने की बाबत पूछा तो वह बोला,‘साहब जहॉं तक मुझे पता चला है कि वह यहॉं आकर बहुत दुखी था। दरअसल वह यहॉं यह सोचकर आया था कि उसे संभ्रांत लोगों के इस मोहल्ले में कुछ अच्छा माहौल मिलेगा और वह अपने बीबी-बच्चों की परवरिश अच्छे ढंग से कर सकेगा परन्तु किसी पड़ौसी की आए दिन की घरेलू लड़ाई-झगड़ों ने उसे यहॉं चौन से रहने ही नहीं दिया। अब तुम्ही बताओ बाबूजी, इस तरह के लड़ाई-झगड़े वाले माहौल में कोई शरीफ आदमी भला कैसे रह सकता है। कहीं पड़ौसी के घर की लड़ाई-झगड़े का असर उसके घर तक पहुच जाता तो वह ग़रीब बेचारा तो कहीं का नहीं रहता।’

Monday, May 2, 2011

राजभाषा संस्थान द्वारा सोलन में राजभाषा संगोष्ठी, कार्यशाला व किशोर कृत "खरी-खरी" पोस्टर प्रदर्शनी का आयोजन





सोलन, हि.प्र.। गत दिनों यहाँ प्रसिद्ध हिन्दी सेवी रहे स्व. श्री हरिबाबू कंसल द्वारा ठित राजभाषा संस्थान, नई दिल्ली द्वारा 27 से 29 अप्रै, 2011 तक अपनी 70 वीं हीरक जयन्ती संगोष्ठी एवं कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें दिल्ली सहित देश भर के दो दर्जन से भी अधिक सरकारी कार्यालयों के सैकड़ों प्रतिनिधियों ने भाग लिया। संगोष्ठी व कार्यशाला के दौरान प्रसिद्ध हिन्दी विद्वानों सर्वश्री गोपेश गोस्वामी (नौएडा) एवं डॉ. महेश चंद्र गुप्त व निशिकांत महाज (दिल्ली) ने बदलते व्यवसायिक परिवेश में हिन्दी, कार्यानवयन प्रक्रिया के अंग व वातावरण अनुकूलन, आस्था, विश्वास व निष्ठा, कम्प्यूटरीकरण व सूचना प्रौद्यागिकी एवं राजभाषा प्रबंधन आदि अनेक विषयों पर अपने वक्तव्य प्रस्तुत किए। इस अवसर पर विभिन्न कार्यालयों से आए प्रतिनिघियों ने अपने आलेख भी प्रस्तुत किए।

संगोष्ठी के दौरान प्रतिभागियों का कुफरी, कसौली व शिमला आदि स्थानों का ज्ञानवर्द्धक व रोचक शैक्षिक भ्रमण भी कराया गया और विभिन्न कार्यालयों कोे उनकी हिन्दी संबंधी उत्कृष्ट गतिविधियों व गृह पत्रिकाओं के प्रकाशन व सुंदर आलेख प्रस्तुतिकरण के लिए सम्मानित किया गया।

इसमें नई दिल्ली के विस्तार निदेशालय कार्यालय से शामिल हुए सहायक निदेशक श्री किशोर श्रीवास्तव को भी अपने कार्यालय में हिन्दी का सुंदर ढंग से प्रयोग करने व हिन्दी संबंधी उत्कृष्ट गतिविधियों के लिए सम्मानित किया गया। इस अवसर पर राजभाषा हिन्दी व अन्य सामाजिक विषयों को लेकर निर्मित व दो दशकों से भी अधिक समय से निरन्तर देश भर में प्रदर्शित हो रही श्री किशोर श्रीवास्तव की कार्टून पोस्टर प्रदर्शनी ‘खरी-खरी’ का आयोजन भी किया गया। जिसे प्रतिभागियों व अन्य आगन्तुकों ने अत्यन्त सराहा। समस्त कार्यकम्रों का सुंदर संयोजन संस्थान के मुख्य कार्यपालक श्री सुधीश कंसल ने किया।
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Thursday, April 21, 2011

विवशता











मां का

परदेश में

नौकरी कर रहे

बेटे से मिलने जाना

या

बेटे का

मां से मिलने आना

अब दोनों के समय

और मन पर नहीं

रेल रिजर्वेशन पर

निर्भर है।

Thursday, April 7, 2011

घटे वही जो राशिफल बताए...... (राष्ट्र-किंकर पत्रिका के वर्ष प्रतिपदा विशेषांक, 2068 में प्रकाशित मेरा व्यंग्य)




मुझे बचपन से ही पत्र-पत्रिकायें पढ़ने का क्रांतिकारी शौक रहा है। पत्र-पत्रिकाओं में लिखी बातों के प्रति मैं सदैव गंभीर भी रहा हॅंू। मेरे एक शोध के अनुसार, एक-दूसरे प्रकाशन में तमाम भिन्नताओं और अपने आपको आधुनिक दिखाने की होड़ के बावज़ूद ज़्यादातर पत्र-पत्रिकाओं में राशिफल यानी दैनिक भविष्यफल का प्रकाशन अवश्य किया जाता है। करोड़ों, अरबों की जनसंख्या वाली इस दुनियॉ के सभी लोगों का भविष्य मात्र 12 राशियों में कैसे समाया रहता है, मेरे शोध का यह भी सदैव एक विषय रहा है। इन सबके अलावा मुझे यह बात सबसे अधिक आश्चर्यजनक लगती है कि करोड़ों की भीड़ वाले इस देश के सभी ज्योतिषियों की नज़रें अक्सर मुझी पर क्यों टिकी रहती हैं।
दरअसल प्रातः किसी भी अखबार के पन्ने पलटते समय जब भी मेरी नज़रें उसमें प्रकाशित अपने दैनिक भविष्यफल पर पड़ती हैं तो प्रायः मुझे बस यही लगता है कि मेरी राशि में लिखी बातें अधिकांशतः मुझे ही केंद्र में रखकर लिखी गई हैं। करोड़ों की भीड़ में ज़्यादातर पत्र- पत्रिका के ज्योतिशाचार्यों का प्रायः मेरे जीवन के इर्द-गिर्द ही घूमते रहना मुझे अजीब सा लगता है।
भले ही किसी के गले से नीचे यह बात न उतरे कि जिस संसार में ‘म’ से ‘मनुआ’ और ‘म’ से ‘माननीय मनमोहन सिंह’ और ‘मुशर्रफ’ या ‘ब’ से ‘बच्चू लाल’ और ‘ब’ से ‘बुश’ का नाम एक साथ शुरू होता हो वहॉं सभी की ज़िंदगियॉं चंद अक्षरों की राशि में कैसे समा सकती हैं, इसके बावजूद अनेक वैज्ञानिक और गैर अंध विश्वासी प्रकृति के भी बहुत कम लोग ही ऐसे होंगे जो प्रातः अखबार हाथ में लेने के पश्चात् चोरी-छिपे ही सही अपना दैनिक भविष्यफल न देखते-पढ़ते हों।
खैर मैं बात कर रहा था उन ज्योतिषाचार्यों की जो हर पल मेरे ही जीवन में ताक-झॉंक करने की कोशिश में लगे रहते हैं।
मुझे मेरी राशिफल ने पहली बार उस समय चौकन्ना किया जब अपनी कंपनी में पदोन्नति से संबंधित एक कानूनी लड़ाई जीतने के बाद मैंने अपनी राशिफल में लिखा पाया कि ‘विभागीय मामले में कानूनी लड़ाई जीतने के बाद भी आपको उसका लाभ मिल पायेगा इसमें संदेह ही है।’ और अंततः राशि में लिखी बातों को हवा में उड़ा देने के बावजूद वही हुआ जो ज्योतिषाचार्य जी की भविष्यवाणी थी। कंपनी के जिन कर्मचारियों की मेहरबानी ने मुझे पॉंच साल तक अदालत का घंटा बजाने को मजबूर किया था, उन्होंने अदालती निर्णय में ऐसा पेंच निकाला कि पुनः अगले पॉंच साल अदालत की चौखट पर अपनी इकलौती नाक रगड़ने की बजाए मैंने यथास्थिति बनाये रखने में ही अपनी भलाई समझी। मैं प्रायः उन लोगों से प्रभावित रहा हॅंू जो ग़लत बातों और अन्याय करने या सहने के सदैव विरोधी रहे हैं। अतः अपनी दो कौड़ी की हैसियत को नज़रअंदाज़ करते हुए सही-ग़लत को लेकर मैं अक्सर किसी न किसी से भिड़ा ही रहता हॅंू। ऐसे में जब न तब मेरी राशि मेरे पथप्रदर्शक का काम करते हुए मुझे सुरक्षा भी प्रदान करती है। एक दिन ऑफिस में शाम को मुझे पता चला कि मेरी किसी फाइल को लेकर मेरे साहब मेरी ताजपोशी करने वाले हैं परन्तु अचानक किसी मीटिंग में चले जाने के कारण मेरी ताजपोशी के कार्यक्रम का मुहूर्त उन्हें रद्द करना पड़ा। पर मुर्गे का बाप कब तक खैर मनाता। अगले दिन मुझे अपने बास के खास कार्यक्रम का प्रतिभागी बनना ही था। उस दिन मेरी राशि में साफ-साफ लिखा था कि, ‘आज कार्यक्षेत्र में तनाव की स्थिति बन सकती है। बॉस की ग़लत बातों का भी विरोध न करने में ही अपनी भलाई समझें। उनकी फटकार को गंभीरता से न लें।’ राशिफल में पूर्ण विश्वास जम जाने के कारण ही बॉस और स्वयं मुझसे खुंदक खाये कुछ सहकर्मियों के उकसाये जाने के बावज़ूद उस दिन मैं पूरे समय बॉस के सामने सिर झुकाये ही बैठा रहा। बॉस की सही क्या ग़लत बातों का भी मुझ पर कोई असर नहीं हुआ। और मैं अपनी न की गई ग़लतियों को भी अपने सिर ओढ़ता रहा। मेरी इस सहनशीलता और चुप्पी को भी मेरे बॉस ने अपना अपमान समझा। जब उन्होंने झल्लाकर मुझसे हर वक्त ग़लत बातों पर भी बराबरी से टक्कर लेने वाली मुद्रा त्यागकर चुपचाप सिर झुकाये बैठे रहने का राज़ पूछा तो मैंने उस दिन के अखबार में छपी अपनी राशिफल की कटिंग उनके सामने रख दी।
एक दिन कार्यालय से घर जाते समय बस में सीट को लेकर एक बेअक्ले पहलवान टाइप व्यक्ति ने रौब गॉंठकर मुझे टक्कर लेने के लिये उकसाया। मुझे लगा कि कोई अदृश्य शक्ति चूहे के मुंह से शेर की दहाड़ निकलवाने का प्रयत्न कर रही है। मैंने तत्काल उस दिन के एक दैनिक समाचार पत्र में छपी अपनी राशिफल का मार्गदर्शन प्राप्त किया। राशिफल में मुझे साफ चेतावनी दी गई थी कि, ‘यात्रा के दौरान किसी चौड़े शरीर वाले व्यक्ति से कहा-सुनी के आसार हैं। बेहतर यही होगा कि ऐसे समय बचाव की मुद्रा में रहें वरना शारीरिक क्षति पहुॅंचना संभव है।’ और फिर मैंने उस पहलवान की झगड़ा मोल लेने की तमाम कोशिशों को नज़रअंदाज करते हुए, उससे पीछा छुड़ाने में ही अपनी भलाई समझी।
अपनी मेहमाननवाजी और मित्रता निभाने के प्रिय शौक के चलते जिस माह के आखिरी दिन मैं अपने घर में आने वाले पॉंचवें मेहमान की अगवानी में जुटा हुआ था उसी दिन मेरी राशिफल में छपा था, ‘अस्थाई सुख और मैत्रीपूर्ण संबंधों की इच्छा आपको अपनी वास्तविक ज़िम्मेदारियों से भटका रही हैं। परिवार के सदस्यों के प्रति भी गंभीरता से सोचें। बाहर के लोगों पर पैसा लुटाने से आप बड़े आदमी नहीं बन सकते, अगर कुछ करना है तो अपने घर से शुरूआत करें।’

शुरू-शुरू में राशिफल में लिखी जो बातें मेरे लिये तनाव का कारण बनती थीं अब वे ही लगातार मेरा मार्गदर्शन करती दिखाई पड़ती हैं। इन सबके बावजू़द मुझे किन्हीं अखबारों के ज्योतिषाचार्यों से कुछ शिकायतें भी हैं। ‘पत्नी से तनाव मिलेगा’, ‘संतान दुख का कारण बनेगी’, ‘घर पर मेहमान पधारेंगे’, ‘अनावश्यक खर्च होगा’, ‘सड़क पर चलते समय सावधानी बरतें’ या ‘स्वास्थ्य प्रभावित होगा’ और ‘कार्य क्षेत्र में लापरवाही का खामियाजा भुगतना पड़ेगा’ जैसी राशिफल में लिखी बातें फिर भी बर्दाश्त की सीमा में रहती हैं परन्तु जब कभी मुझे बढ़ती उम्र के बावज़ूद अपनी राशि में, ‘रोमांस के अवसर मिलेंगे’, ‘कोई सुंदर युवा महिला आपके करीब आयेगी’, ‘पुरानी प्रेमिकाओं से सामना होगा’ या ‘किसी अन्जान युवती के साथ डिनर का लुत्फ उठायेंगे’ अथवा ‘प्यार के मामले में अंतिम अवसर का लाभ उठायें’ जैसे वाक्य देखने को मिलते हैं तो ठंड के मौसम में भी मैं पसीने से नहा जाता हूॅं। यही नहीं मुझे श्रीमती जी की नज़रों से बचाकर अखबार को कहीं छुपाने पर भी मज़बूर होना पड़ जाता है। एकाध बार ‘रोमांस के अवसर प्राप्त होंगे’ जैसी भविष्यवाणियों के चलते, किसी महान व्यक्ति के नाम पर बने बदनाम पार्क के पिछले दरवाज़े से उसमें घुसने की कोशिश भी करनी चाही तो वहॉं गहरी नींद में भी मुश्तैदी से पहरेदारी करती पुलिस को देखकर कदम ठिठक गये। कभी टीवी के समाचार चौनलों की अतिशय सक्रियता भी आड़े आ गई जो किसी व्यक्ति के बाहर तक उजागर अच्छे गुणों को हाईलाइट करने की बजाए उसके अंदर के दबे-कुचले शैतान को जनता के सामने लाने हेतु ज़्यादा प्रयत्नशील रहते हैं। इसके अलावा आज दूसरों के सुख से चिंतित मित्र और पड़ौसी आदि भी टीवी के रंगीन पर्दे पर मुंह पर तौलिया ढंके मित्र की एक झलक देखने की आस में हर पल समाचार चैनलों पर अपनी नज़रें गड़ाये बैठे रहते हैं।

Tuesday, March 29, 2011

राशिफल की सत्यता...??????


दुनिया में रहने वाले अरबों लोगों का भविष्य फल भला 12 राशियों में कैसे समा सकता है? यह जानने के बावजूद प्रातः अखबार के पन्ने पलटते हुए दैनिक राशिफल पर हम सबकी नजरें पड़ ही जाती हैं, चाहे हम इसे हल्के में लें या गंभीरता से। वैज्ञानिक युग में जीने का दावा करने तमाम आधुनिकताओं के बावजूद मैं भी राशिफल देखने का आदी रहा हूं। और कमोवेश मुझे इस पर यकीन भी होता है। ताज्जुब की बात यह भी है कि नवभारत टाइम्स में पं. केवल आनन्द जोशी द्वारा दिया गया राशिफल प्रायः मेरे जीवन में घटने वाली घटनाओं से काफी मेल खाता है और गाहे-बगाहे मुझे मेरी परिस्थितियों के अनुसार सचेत भी करता रहता है। जैसे, आज ही मैंने पढ़ा- ‘दूसरों को सुधारना आपके बस की बात नहीं है। आज के दिन भी कुछ ऐसी ही चुनौती आपको मिल सकती है। आपके लिए अच्छा यही रहेगा कि किसी विवाद और झगड़े से दूर रहें......’ आपकी इस बारे में क्या राय है?

Thursday, January 20, 2011















मैंने
उस हर चीज़
को प्यार किया,
जिसको ...
तुमने छुआ।
और एक तुम हो
जिसको
मुझसे ही
प्यार न हुआ...।